**अब तक आपने कहानी में पढ़ा...**
कैसे एक ट्रक ने देव और साक्षी को टक्कर मार दी थी और दोनों को अत्यंत गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया। वहाँ दोनों छह महीने तक कोमा में रहे। डॉक्टरों ने इसे बेहद गंभीर दुर्घटना बताया था।
फिर एक दिन जब दोनों को होश आया, तो उनके व्यवहार को देखकर घर वाले परेशान हो गए। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि ऐसा भी हो सकता है। लेकिन यह संसार अपने आप में एक चमत्कार है, और यहाँ चमत्कारों की संख्या अनंत है।
हुआ यह कि देव और साक्षी की आत्माएँ आपस में बदल गई थीं। देव, साक्षी के माता-पिता को "माँ" और "बाऊजी" कहने लगा, जबकि साक्षी, देव के माता-पिता को "मम्मी-पापा" कहने लगी।
जब डॉक्टरों ने दोनों की जाँच की, तो बताया कि वे पूरी तरह खतरे से बाहर हैं, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि उनकी आत्माएँ आपस में बदल गई हैं। साक्षी अब देव जैसा व्यवहार कर रही है और देव, साक्षी जैसा।
दुर्घटना से पहले दोनों ने कई कार्यक्रमों और अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हुए थे। इसलिए उन्होंने इस विचित्र घटना के बारे में किसी को बताना उचित नहीं समझा। उन्हें लगा कि शायद कुछ समय बाद सब कुछ सामान्य हो जाए। यही सोचकर दोनों अपने-अपने काम में लग गए।
---
### आगे की कहानी में:
**देवी (साक्षी)** का अर्थ है — **देव के शरीर में साक्षी की आत्मा।**
**साक्षी (देव)** का अर्थ है — **साक्षी के शरीर में देव की आत्मा।**
इन्हीं नामों का प्रयोग आगे कहानी में किया जाएगा।
---
साक्षी, जो दुर्घटना से पहले एक कलाकार थी, मंच पर कार्यक्रम प्रस्तुत करती थी। अभिनय ही उसका पहला प्रेम था। उसे एक्टिंग से बेहद लगाव था।
वहीं देव एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था, जिसे एक बड़ी कंपनी ने नियुक्त किया था।
अब जब सब कुछ उलट-पुलट हो चुका था, तो स्थिति भी विचित्र हो गई थी। साक्षी साड़ी पहनती थी, जबकि देव पैंट-टी-शर्ट पहनता था। दोनों में अक्सर इस बात पर बहस होती रहती थी कि किसका कार्य-क्षेत्र अधिक लोकप्रिय है और लोगों द्वारा अधिक पसंद किया जाता है।
अब देव के शरीर में मौजूद साक्षी की आत्मा को सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के बारे में लगभग कुछ भी पता नहीं था। हालाँकि साक्षी के शरीर में मौजूद देव की आत्मा ने उसे कुछ बुनियादी बातें समझा दी थीं। उसी तरह साक्षी ने भी देव को अभिनय की कुछ मूल बातें सिखा दी थीं।
देव और साक्षी की आत्माएँ तथा मन बदल गए थे, लेकिन बाकी सब कुछ वैसा ही था। शरीर की बनावट, चेहरा और आवाज़ पहले जैसी ही थी। देखने वाला कोई भी व्यक्ति यह नहीं कह सकता था कि देव वास्तव में देव नहीं है। लेकिन मन बदल जाने से हाव-भाव और व्यवहार भी बदल जाते हैं।
---
ऑफिस जाने से पहले देव, साक्षी को घर से लेने आता था, उसे एक्टिंग स्कूल छोड़ता और फिर अपने कार्यालय चला जाता था।
दुर्घटना के बाद भी यही क्रम जारी था। अब **देवी (साक्षी)**, **साक्षी (देव)** को एक्टिंग स्कूल छोड़कर अपने ऑफिस जाती थी।
रास्ते में **देवी (साक्षी)** ने कहा,
"देखो, मैं अब बाइक चलाना सीख गई हूँ। तुम डरना मत।"
**साक्षी (देव)** ने तुरंत टोका,
"सीख *गई* नहीं, सीख *गया*। अब तुम साक्षी नहीं, देव हो।"
**देवी (साक्षी)** बोली,
"देखो, यह मेरे लिए बहुत कठिन काम है। तुम ही बाइक चला लो ना, देव... ओह, सॉरी... साक्षी।"
**साक्षी (देव)** मुस्कुराकर बोली,
"देखो, हमें पूरी कोशिश करनी होगी कि कोई हमारी सच्चाई जान न पाए। अब तुम देव हो, इसलिए देव की तरह व्यवहार करो।"
**देवी (साक्षी)** ने शिकायत भरे स्वर में कहा,
"लेकिन तुम्हारे इस बड़े से शरीर के साथ चलना ही मुश्किल है, ऊपर से यह भारी-भरकम बाइक भी!"
**साक्षी (देव)** ने हौसला बढ़ाते हुए कहा,
"तुम कर लोगे, देव। और आज से तुम मुझे 'साक्षी' कहा करो। मैं तुम्हें 'देव' कहूँगी, ठीक है?"
इतना कहने के बाद साक्षी (देव) ने देवी (साक्षी) को पीछे से बाँहों में भर लिया और मुस्कुराते हुए कहा,
साक्षी (देव) — "चलो देव, अब बाइक पर ध्यान दो।"
देवी (साक्षी) — "अरे-अरे! मुझे गुदगुदी हो रही है, बाइक गिर जाएगी।"
साक्षी (देव) — "तुम भी तो पहले मेरे साथ ऐसा ही करती थीं, अब मेरी बारी है।"
---
**बाकी अगले भाग में...**
💬 Comments (0)
अपनी राय दें