आगे की कहानी का अगला भाग:
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### **भाग ९: सबूतों का कटघरा और अतीत के राज़**
कविता ने अपने हाथ सीने पर बांधे और कमरे में मौजूद चारों अन्य सहेलियों—नेहा, रिद्धि, स्नेहा और तान्या—की तरफ़ देखा। सब अवाक् थीं।
**कविता:** "ठीक है! अगर तुम सच में 'साक्षी' हो (देव के शरीर की तरफ़ उंगली उठाते हुए)... तो मुझे तीन ऐसी बातें बताओ जो सिर्फ मेरे और साक्षी के बीच थीं, जिन्हें कोई तीसरा इंसान सोच भी नहीं सकता!"
कमरे में सन्नाटा छा गया। साक्षी (देव के शरीर में) ने राहत की सांस ली। उसने मन ही मन सोचा कि कम से कम अब उसकी याददाश्त काम आएगी।
**देव (जिसमें साक्षी की आत्मा है):** "पहला सबूत—१०वीं क्लास के फेयरवेल में जब तुम्हारा आईलाइनर फैल गया था, तो तुम वॉशरूम में छिपकर रो रही थीं। तब मैंने तुम्हें अपनी जेब से पिंक कलर का रुमाल दिया था जिस पर 'S' लिखा था।"
कविता की आँखें चौंककर बड़ी हो गईं।

**देव (साक्षी):** "दूसरा—तुम्हारा वो सीक्रेट क्रश, जो हमारे स्कूल का स्पोर्ट्स कैप्टन था... उसका नाम था रोहन! और तुमने उसकी फोटो अपनी डायरी के आख़िरी पन्ने में छिपा रखी थी, जो सिर्फ मुझे दिखाई थी।"
नेहा और रिद्धि ने एक-दूसरे को देखा। कविता का मुंह खुला का खुला रह गया।
**देव (साक्षी):** "और तीसरा सबूत... पिछले साल जब तुम्हारा ब्रेकअप हुआ था, तब हम रात के २ बजे तक छत पर बैठकर ठंडी आइसक्रीम खा रहे थे और तुम चिल्ला-चिल्लाकर गा रही थीं। अब बोलो?"
[Image3]
कविता के चेहरे से रंग उड़ चुका था। उसने देव (जिसमें साक्षी है) के विशाल, मस्कुलर शरीर को देखा और फिर साक्षी (जिसमें देव की आत्मा है) की तरफ़ मुड़ी।
**कविता:** (कांपती आवाज़ में) "हे भगवान! तू... तू सच में साक्षी है? इस... इस पहलवान के शरीर में?"
**साक्षी (जिसमें देव की आत्मा है):** (चाय का कप रखते हुए, आश्वस्त अंदाज़ में) "हां कविता! और मैं 'देव' हूँ। अब तो यकीन हो गया ना? मुझे इस सूट-दुपट्टे से आज़ादी दिलाओ यार!"

तभी स्नेहा (दूसरी सहेली) चिल्ला उठी, "इसका मतलब... जब मैंने कल फोन पर साक्षी समझकर अपने बॉयफ्रेंड की बुराई की थी... वो बातें तू सुन रहा था देव?!"
**साक्षी (देव):** (झेंपते हुए) "हां... पर कसम से मैंने किसी को नहीं बताया! वैसे तुम्हारा बॉयफ्रेंड सच में थोड़ा अजीब है।"
सब सहेलियां एक साथ हंस पड़ीं, पर तुरंत ही माहौल गंभीर हो गया।
**तान्या:** "लेकिन यह सब कैसे संभव है? मेडिकल साइंस में तो ऐसा कुछ होता ही नहीं!"
**देव (साक्षी):** "हमें खुद नहीं पता। जब से होश आया है, हम एक-दूसरे की ज़िंदगी जीने की कोशिश कर रहे हैं। पर सबसे बड़ी मुसीबत यह नहीं है..."

**साक्षी (देव):** "असली मुसीबत वो ट्रक ड्राइवर है। कल रात उसने साक्षी (देव) पर आक्रमण करने की कोशिश की थी। कोई है जो हम दोनों को मारना चाहता है... और उसे हमारी इस आत्मा बदलने की सच्चाई का अंदाज़ा है।"
कविता ने गंभीर होकर कहा, "अगर ऐसा है, तो यह कोई साधारण एक्सीडेंट नहीं था। यह एक सोची-समझी साजिश थी! साक्षी... देव... तुम्हें अपनी सुरक्षा के लिए कुछ बड़ा करना होगा, इससे पहले कि वो दोबारा आक्रमण करे।"
सहेलियों ने वादा किया कि वे इस राज को अपने तक ही रखेंगी और अब इस गुत्थी को सुलझाने में देव और साक्षी की मदद करेंगी।
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पिछले कुछ दिनों से चली आ रही चिंता अब जाकर कुछ कम हुई थी। अपनी इस विचित्र परिस्थिति को थोड़े हल्के ढंग से सँभालने के विषय में सोचते हुए, देव और साक्षी ने मान लिया कि आज के दिन को सँभालने का एक ही उपाय है—**पूरी सच्चाई बताना।**
साक्षी, जो इस समय देव के सुडौल और व्यायाम से मजबूत शरीर में थी, और देव, जो साक्षी के शरीर में फँसा हुआ था, देव के कार्यालय के काँच के द्वार के बाहर खड़े थे।
**साक्षी (देव के शरीर में):**
(घबराते हुए देव की कमीज़ का गला ठीक करते हुए)
"मुझे अभी भी लगता है कि यह बहुत भयानक विचार है। हमें आज छुट्टी ले लेनी चाहिए। वे लोग सोचेंगे कि हमारा दिमाग़ खराब हो गया है।"
**देव (साक्षी के शरीर में):**
"क्या तुम मज़ाक कर रही हो? आज मेरे बड़े काम की प्रगति बताने की बैठक है! और अमन तथा रोहन मेरे सबसे अच्छे मित्र हैं। वे समझेंगे। चलो, बस उन्हें यह रहस्य बता देते हैं।"
वे दोनों एक साथ उजले और व्यस्त कार्यालय के भीतर चले गए। देव के दो सबसे करीबी कार्य-मित्र, अमन और रोहन, पेय बनाने की मशीन के पास खड़े होकर बातचीत कर रहे थे।

**अमन:**
"अरे देव! दुर्घटना के बाद तो तुम बिल्कुल ठीक लग रहे हो!"
फिर अमन ने देव, जो इस समय साक्षी के शरीर में था, की ओर देखा और बोला—
"और यह सुंदर युवती कौन है?"
देव, जो साक्षी के शरीर में था, आँखें घुमाता हुआ आत्मविश्वास के साथ अमन के पास गया और उसके कंधे पर ज़ोर से हाथ मारा, ठीक उसी प्रकार जैसे वह पहले भी किया करता था।
**देव (साक्षी के शरीर में):**
"चुप रहो, अमन। अपनी ये घटिया प्रेम-पंक्तियाँ अपने पास रखो। यह मैं हूँ—देव।"
अमन उसी क्षण अपने पेय में बुरी तरह खाँसने लगा। वह लगातार खाँसता रहा। रोहन ने अपने सामने खड़ी युवती को पूरी उलझन के साथ घूरना शुरू कर दिया।
**रोहन:**
"रुको... क्या? **तुम** देव हो?"
रोहन ने काँपती हुई उँगली से साक्षी की ओर संकेत किया। साक्षी इस समय देव के सुडौल शरीर में खड़ी थी और हाथ में एक छोटा-सा थैला पकड़े हुए थी।
"तो फिर यह कौन है?!"
साक्षी, जो देव के शरीर में थी, ने छोटा-सा विनम्र हाथ हिलाया और बहुत शांत, संकोची मुस्कान दी।
**साक्षी (देव के शरीर में):**
"नमस्ते मित्रों। मैं साक्षी हूँ। मुझे पता है कि मैं देव जैसी दिखाई दे रही हूँ... लेकिन वास्तव में साक्षी ही हूँ। जिस देव को तुम जानते हो, वह वहाँ खड़ा है... मेरे शरीर में।"
अमन ने अपना मुँह पोंछा, फिर रोहन की ओर देखा। दोनों कुछ क्षण एक-दूसरे को देखते रहे और फिर अचानक ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे।
[IMAGE8]
**अमन:**
"अरे देव! यह तो तुम्हारे अब तक के सबसे अच्छे कार्यालयी मज़ाकों में से एक है! सच में, अपनी प्रेमिका से अपने बदले हुए रूप का अभिनय करवाना? बहुत बढ़िया योजना है!"
**देव (साक्षी के शरीर में):**
(बहुत झुँझलाकर लंबी साँस छोड़ते हुए)
"यह कोई मज़ाक नहीं है! दुर्घटना में हमारी आत्माएँ एक-दूसरे के शरीर में चली गई हैं! देखो अमन, अगर मैं देव नहीं हूँ, तो मुझे कैसे पता कि पिछले महीने तुमने गलती से ग्राहक का पूरा आँकड़ा-संग्रह (Data) मिटा दिया था और अपने अधिकारी को यह कहकर बात छिपा दी थी कि यह किसी यंत्र की खराबी के कारण हुआ था, ताकि तुम्हारी नौकरी न चली जाए?"
अमन की हँसी उसी क्षण रुक गई।
उसके चेहरे का सारा रंग उड़ गया। वह अपने सामने खड़ी युवती को भय से देखने लगा।
**अमन:**
(धीरे से)
"देव? मित्र... क्या... क्या सच में उस शरीर के भीतर तुम ही हो?"
**देव (साक्षी के शरीर में):**
(अपनी बाँहें सीने पर बाँधते हुए)
"हाँ! और यहाँ साक्षी को—"
उसने अपने सुडौल शरीर की ओर संकेत किया।
"—कंप्यूटर प्रोग्राम की एक भी पंक्ति लिखना नहीं आता। इसलिए आज तुम दोनों को मेरा सारा कंप्यूटर संबंधी काम करना होगा, जबकि मैं तुम्हारे पास बैठकर बताऊँगा कि ठीक-ठीक क्या लिखना है। समझ गए?"
साक्षी, जो देव के शरीर में थी, ने विनम्रता से सिर हिलाया।
**साक्षी (देव के शरीर में):**
"हाँ, कृपया इसके काम का ध्यान रखना। मुझे तो इसका काम वाला कंप्यूटर चलाना भी नहीं आता।"
रोहन धीरे से पास रखी कुर्सी पर बैठ गया और खाली आँखों से फर्श को देखने लगा।
उसका दिमाग़ पूरी तरह उलझ चुका था। वह यह समझने का प्रयास कर रहा था कि उसका सुडौल शरीर वाला, कंप्यूटर प्रोग्राम बनाने में निपुण सबसे अच्छा मित्र इस समय पोशाक पहने हुए एक झुँझलाई हुई युवती बना खड़ा है, जबकि उसके पास खड़ा व्यक्ति हाथ में छोटा-सा थैला लिए हुए एक विनम्र युवती जैसा व्यवहार कर रहा है।
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